Author : Arun Ramchandra Pangarkar Founder : Shramik Kranti Mission – Voice of the Poor Open Letter to the Prime Minister India–USA Trade Agreement and the Future of Farmers This letter has been formally submitted on the Government of India’s PG Portal. Registration Number : PMOPG/E/2026/0022461 Subject: Concern regarding the interests of farmers and workers in the context of the India–USA Trade Agreement To, Hon’ble Prime Minister of India, Respectful greetings. As a conscious Indian citizen, I wish to place before you my serious concern regarding the future of farmers, workers, and the poor in the context of the India–USA trade agreement. Netaji Subhas Chandra Bose had clearly stated that political freedom remains incomplete unless the nation becomes economically self-reliant. Similarly, Dr. Babasaheb Ambedkar warned that no democracy can survive withou...
भाग २ : फुकटखाऊ की असली पहचान
- Get link
- X
- Other Apps
भाग २ : फुकटखाऊ की असली पहचान
प्रिय साथियो,
जब सरकार गरीबों को राशन पर अनाज देती है, तब कुछ अमीर लोग शोर मचाते हैं – "इससे लोग आलसी हो जाएंगे, मुफ्तखोरी बढ़ेगी।"
लेकिन असली मुफ्तखोर कौन हैं? आइए उनकी पहचान करें।
⚠️ असली मुफ्तखोर कौन?
- सरकारी शिक्षक – कक्षा में पढ़ाते नहीं, लेकिन प्राइवेट ट्यूशन से मोटी कमाई करते हैं।
- आश्रमशाला के घोटाले – गरीब छात्रों के लिए आया सरकारी कोटा चोरी-छिपे बेच दिया जाता है।
- भ्रष्ट पुलिस व अधिकारी – काले धंधेवालों से हफ्ता लेकर उन्हें आज़ाद छोड़ देते हैं।
- सरकारी डॉक्टर – सरकारी अस्पताल में सेवा न देकर अपनी निजी क्लिनिक में पैसे कमाते हैं।
- निजी डॉक्टर – रोग छोटा हो तो भी बड़ा बताकर मरीज को लूटते हैं।
- प्रॉपर्टी दलाल – जमीन, घर के सौदों में गरीबों को फंसाकर भारी दलाली खाते हैं।
- भेसल माफिया – खाने में मिलावट कर लोगों की सेहत और जान से खिलवाड़ करते हैं।
❗ असली सच्चाई
ये सब लोग समाज की मेहनत पर पलते हैं, लेकिन किसी को इन्हें “मुफ्तखोर” कहने की हिम्मत नहीं होती। उल्टा, जब सरकार असली गरीब को थोड़ा-सा अनाज देती है, तो उस पर उंगली उठाई जाती है।
🌍 समाज के लिए संदेश
मुफ्तखोरी का मतलब सिर्फ राशन लेना नहीं है।
मुफ्तखोरी का मतलब है —
👉 बिना काम किए जनता का शोषण करना,
👉 अधिकार का दुरुपयोग कर धन कमाना।
प्रिय साथियो,
गरीब को मिलने वाला अनाज उसका हक है।
असली मुफ्तखोर वह है, जो समाज को कुछ भी योगदान न देकर केवल लूट करता है।
🔜 अगले भाग में देखेंगे – “समाधान – आदर्श अर्थ वितरण प्रणाली”
- Get link
- X
- Other Apps
Comments
Post a Comment
✊ आपले विचार खाली नोंदवा. श्रमिकांच्या हक्कासाठी एक विधायक विचारही परिवर्तन घडवू शकतो. सभ्य आणि विचारशील प्रतिक्रिया स्वागतार्ह आहेत.
✊ अपने विचार नीचे दर्ज करें। श्रमिकों के अधिकारों के लिए आपका एक सकारात्मक विचार भी परिवर्तन ला सकता है। शालीन और रचनात्मक टिप्पणियों का स्वागत है।
✊ Share your thoughts below. Even a single constructive idea can bring change for workers’ rights. Respectful and meaningful comments are always welcome.