Open Letter to the Prime Minister India–USA Trade Agreement and the Future of Farmers

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Author : Arun Ramchandra Pangarkar Founder : Shramik Kranti Mission – Voice of the Poor Open Letter to the Prime Minister India–USA Trade Agreement and the Future of Farmers This letter has been formally submitted on the Government of India’s PG Portal. Registration Number : PMOPG/E/2026/0022461 Subject: Concern regarding the interests of farmers and workers in the context of the India–USA Trade Agreement To, Hon’ble Prime Minister of India, Respectful greetings. As a conscious Indian citizen, I wish to place before you my serious concern regarding the future of farmers, workers, and the poor in the context of the India–USA trade agreement. Netaji Subhas Chandra Bose had clearly stated that political freedom remains incomplete unless the nation becomes economically self-reliant. Similarly, Dr. Babasaheb Ambedkar warned that no democracy can survive withou...

बाढ़ पीड़ितों के लिए समाज का राष्ट्रीय कर्तव्य

 

बाढ़ पीड़ितों के लिए समाज का राष्ट्रीय कर्तव्य

बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों की जनता पर आया संकट अत्यंत भीषण है। सरकार ने मदद का हाथ आगे बढ़ाया है। ऐसे समय में सरकारी मदद केवल आवश्यक ही नहीं, बल्कि सरकार की मूलभूत ज़िम्मेदारी और नैतिक कर्तव्य भी है। किंतु केवल सरकारी मदद पर निर्भर न रहते हुए संपूर्ण समाज को एकजुट होकर बाढ़ पीड़ितों की सहायता के लिए आगे आना आज समय की मांग है।


बाढ़ पीड़ितों की स्थिति

बाढ़ पीड़ित किसानों का जीवन पूरी तरह से बर्बाद हो गया है। खेत की फसलें तो बह ही गई हैं, साथ ही उपजाऊ मिट्टी भी बह गई है। होत्याचें नव्हते झाले की स्थिति उत्पन्न हो गई है। ऐसे समय में सरकारी मदद बहुत कम साबित होने वाली है।


समाज की ज़िम्मेदारी

  • जनप्रतिनिधि — विधायक, सांसद और मंत्री अपने एक महीने का वेतन दें।
  • उच्च वेतन पाने वाले सरकारी अधिकारी व कर्मचारी अपनी आय के अनुसार कम से कम एक दिन से लेकर एक महीने का वेतन योगदान करें।
  • समृद्ध उद्योगपति, व्यापारी और धनाढ्य वर्ग भरपूर आर्थिक मदद करें।
  • सामान्य नागरिक अपनी क्षमता के अनुसार मदद का हाथ आगे बढ़ाएँ।

हम क्या कर सकते हैं?

  • अनाज, कपड़े, दवाइयाँ और अन्य आवश्यक वस्तुएँ दान करना।
  • विश्वसनीय स्वंयसेवी संस्थाओं या सरकारी राहत कोष में आर्थिक योगदान करना।
  • बाढ़ पीड़ितों के पुनर्वास के लिए स्वयंसेवक के रूप में समय देना।

हम सब मिलकर किया गया छोटा सा योगदान भी किसी ज़रूरतमंद के लिए बड़ा सहारा बन सकता है।
सच्चा देशप्रेम और सच्ची देशभक्ति दिखाने का यही समय है।
आइए, इस आपदा की घड़ी में एकजुट होकर मानवता का ऋण चुकाएँ!


✍️ श्रमिक क्रांति मिशन: गरीबों की आवाज़

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