भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में

Image
भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में प्रस्तावना आज भारत–अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। विदेशी निवेश, निर्यात वृद्धि और आर्थिक विकास जैसे आकर्षक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन इन चमकदार घोषणाओं के पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है — क्या इन समझौतों में भारतीय किसान, श्रमिक और गरीब जनता के हित सुरक्षित हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के संदर्भ में खोजने की आवश्यकता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस : आर्थिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी नेताजी का स्पष्ट मत था — “राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है, जब राष्ट्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।” नेताजी ने केवल ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि विदेशी आर्थिक शोषण का भी तीव्र विरोध किया। वे भली-भांति जानते थे कि यदि राजनीतिक आज़ादी के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था विदेशी शक्तियों और कंपनियों के हाथों में चली गई, तो स्वतंत्रता केव...

भगत सिंह के गरीबी पर विचार

गरीबी के उन्मूलन पर भगत सिंह के विचार

Bhagat Singh

भगत सिंह का संघर्ष केवल आज़ादी के लिए नहीं था, बल्कि सामाजिक न्याय, आर्थिक समानता और गरीबों की मुक्ति के लिए भी था। उन्होंने कहा था –

“गरीबी किस्मत की नहीं, शोषण की देन है।”

उनका मानना था कि सिर्फ सरकार बदलने से कुछ नहीं होता, पूरी व्यवस्था को बदलना होगा। अगर गरीबी हटानी है, तो:

  • 💼 मज़दूरों को अधिकार, सुरक्षा और न्याय
  • 📚 सबको शिक्षा – मुफ्त और बराबरी से
  • 🌾 किसानों को उचित दाम और समर्थन
  • 🏥 स्वास्थ्य सेवाएँ – निजीकरण से मुक्त

भगत सिंह कहते थे: “क्रांति का मतलब केवल हिंसा नहीं, बल्कि सामाजिक समानता की मांग है।”
अगर हम आज उनके विचारों पर चलें, तो सच्चे मायनों में गरीबीमुक्त भारत बन सकता है।


📢 आपका क्या विचार है?

आपके इलाके में गरीबों को कौन-सी समस्याएं हैं? क्या भगत सिंह के विचार आज भी प्रासंगिक हैं?

👉 हमारे ब्लॉग पर जाएँ और अपनी राय साझा करें

Comments

Popular posts from this blog

✍️ अखेर अवतरली गंगा; शिवपिंडीवरील रक्ताभिषेक पावन झाला लोकप्रतिनिधींच्या भगीरथ प्रयत्नांना यश

भारतातील शेती व्यवसाय: बाजारभाव जुगारासारखा का झाला? इतर देशांतही अशीच परिस्थिती आहे का?

MSP क्यों आवश्यक है?