🚜 एक वहिवाट मार्ग... या हमारे साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की बलि?
🚜 एक वहिवाट मार्ग... या हमारे साथ आने वाली पीढ़ियों के भविष्य की बलि? मानवता, संवाद और संवैधानिक मूल्यों का संदेश "जब रास्ते बंद होते हैं तो नए रास्ते खोजे जा सकते हैं, लेकिन जब इंसानों के दिलों के रास्ते बंद हो जाते हैं, तब पूरा समाज भटक जाता है।" ग्रामीण भारत में खेतों तक जाने वाले वहिवाट (आवागमन) मार्गों को लेकर विवाद कोई नई बात नहीं है। अक्सर कुछ फीट जमीन या रास्ते का विवाद धीरे-धीरे अहंकार, बदले की भावना और सामाजिक वैमनस्य में बदल जाता है। ❖ प्रश्न रास्ते का है या इंसानियत का? जहाँ संवाद समाप्त होता है, वहीं विवाद शुरू होता है। विवाद आरोपों में बदलता है। आरोप झगड़ों में बदलते हैं। और झगड़े अंततः पुलिस, अदालतों और वर्षों तक चलने वाले संघर्ष का कारण बन जाते हैं। ऐसी स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण प्रश्न यह नहीं होता कि कौन जीता और कौन हारा। बल्कि यह होता है— आख़िर नुकसान किसका हुआ? सच्चाई यह है कि दोनों पक्ष हारते हैं। समय नष्ट होता है। धन खर्च होता है। मानसिक शांति समाप्त हो जाती है। आपसी रिश्ते टूट जाते हैं। और सबसे बड़ा नुकसान आने वाली पीढ़ियों का ...