भ्रष्टाचार की परिभाषा बदलने वाला कानून — समय की आवश्यकता
भ्रष्टाचार की परिभाषा बदलने वाला कानून — समय की आवश्यकता आज के समय में “भ्रष्टाचार” शब्द सुनते ही लोगों के मन में सबसे पहले रिश्वत या आर्थिक लेन-देन का विचार आता है। लेकिन क्या भ्रष्टाचार केवल पैसे के लेन-देन तक ही सीमित है? वास्तव में हमारे देश में भ्रष्टाचार साबित करने की जो व्यवस्था है, वह मुख्यतः आर्थिक लेन-देन पर आधारित है। अर्थात, जब तक रिश्वत का प्रमाण नहीं मिलता, तब तक किसी को भ्रष्ट नहीं माना जाता। लेकिन ऐसे प्रमाण जुटाना अत्यंत कठिन होता है। परिणामस्वरूप, स्पष्ट रूप से दिखने वाले गलत कार्यों पर भी कार्रवाई नहीं हो पाती। यदि “भ्रष्टाचार” शब्द का विश्लेषण करें, तो इसका अर्थ है “भ्रष्ट आचरण” — अर्थात कोई भी गलत, अन्यायपूर्ण या अवैध व्यवहार। इसलिए किसी भी अधिकारी, जनप्रतिनिधि या संबंधित व्यक्ति द्वारा किया गया अनुचित या गैरकानूनी कार्य भी भ्रष्टाचार की श्रेणी में आना चाहिए। प्रशासनिक व्यवस्था की वास्तविकता विभिन्न प्रशासनिक विभागों में ऐसी घटनाएं अक्सर देखने को मिलती हैं। जैसे कि गलत प्रमाणपत्र जारी ...