वर्तमान राजनीति और मेरी भूमिका भाई-भतीजावाद से ग्रामहित की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता
वर्तमान राजनीति और मेरी भूमिका भाई-भतीजावाद से ग्रामहित की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता जब मैं अपने गाँव के भविष्य के बारे में सोचता हूँ, तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि वर्षों से स्थानीय राजनीति विकास, शिक्षा, पेयजल, रोजगार, स्वच्छता और जनकल्याण जैसे मूलभूत मुद्दों के बजाय परिवारवाद, गुटबाजी और तथाकथित सामाजिक प्रतिष्ठा के इर्द-गिर्द घूमती रही है। परिवारों की प्रतिस्पर्धा में खोता हुआ विकास चुनाव आते ही गाँव विभिन्न गुटों में बंट जाता है। मतदाता विकास और कार्यक्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि "अपना परिवार", "अपना गुट" और "अपना व्यक्ति" के आधार पर मतदान करता है। परिणामस्वरूप चुनाव समाप्त हो जाते हैं, चेहरे बदल जाते हैं, सत्ता बदल जाती है, लेकिन गाँव की समस्याएँ जस की तस बनी रहती हैं। पीने का पानी, सड़कें, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे...