नेतृत्व का मापदंड उम्र नहीं, कार्य होना चाहिए! "सवाल यह नहीं कि युवा या वरिष्ठ कौन है... सवाल यह है कि योग्य कौन है?"
नेतृत्व का मापदंड उम्र नहीं, कार्य होना चाहिए! "सवाल यह नहीं कि युवा या वरिष्ठ कौन है... सवाल यह है कि योग्य कौन है?" ग्राम पंचायत चुनाव के दौरान आजकल एक नई चर्चा सुनने को मिल रही है— "पुरानी पीढ़ी की जगह युवाओं को अवसर मिलना चाहिए।" युवाओं को अवसर अवश्य मिलना चाहिए। नई सोच, ऊर्जा, तकनीक और परिवर्तन को स्वीकार करने की क्षमता उनकी बड़ी ताकत है। लेकिन केवल युवावस्था ही विकास का मापदंड नहीं हो सकती। जिस प्रकार केवल परिवार, जाति, रिश्तेदारी, धन या व्यक्तिगत संपर्क के आधार पर नेतृत्व नहीं चुना जाना चाहिए, उसी प्रकार केवल उम्र के आधार पर भी किसी को योग्य या अयोग्य नहीं ठहराया जा सकता। गाँव को ऐसा जनप्रतिनिधि चाहिए— ✔ जिसका समाजसेवा का प्रमाणित इतिहास हो। ✔ जिसने जनहित के लिए संघर्ष किया हो। ✔ जिसे प्रशासन और सरकारी व्यवस्था की समझ हो। ✔ जिसके पास विकास की स्पष्ट दृष्टि हो। ✔ जो ईमानदार, पारदर्शी और कर्मठ हो। ✔ जिस पर जनता विश्वास करती हो। 50–60 वर्ष का अनुभवी, ईमानदार और कर्मठ व्यक्ति गाँव के लिए 25 वर्ष के निष्क्रिय व्यक्ति से अधि...