भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में

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भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में प्रस्तावना आज भारत–अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। विदेशी निवेश, निर्यात वृद्धि और आर्थिक विकास जैसे आकर्षक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन इन चमकदार घोषणाओं के पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है — क्या इन समझौतों में भारतीय किसान, श्रमिक और गरीब जनता के हित सुरक्षित हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के संदर्भ में खोजने की आवश्यकता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस : आर्थिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी नेताजी का स्पष्ट मत था — “राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है, जब राष्ट्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।” नेताजी ने केवल ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि विदेशी आर्थिक शोषण का भी तीव्र विरोध किया। वे भली-भांति जानते थे कि यदि राजनीतिक आज़ादी के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था विदेशी शक्तियों और कंपनियों के हाथों में चली गई, तो स्वतंत्रता केव...

जनहित याचिका – मजदूरों के 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय अन्यायपूर्ण

जनहित याचिका – मजदूरों के 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय अन्यायपूर्ण

प्रकरण:
महाराष्ट्र सरकार ने कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के कार्य के घंटे 9 से बढ़ाकर 12 करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए घातक है।

याचिकाकर्ता

Arun Ramchandra Pangarkar
अरुण रामचन्द्र पांगारकर
सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक

प्रतिवादी

  1. महाराष्ट्र सरकार (मुख्य सचिव)
  2. भारत सरकार – श्रम और रोजगार मंत्रालय
  3. महाराष्ट्र सरकार – उद्योग मंत्रालय

मुद्दे

  1. संविधान का उल्लंघन
    – अनुच्छेद 21: जीवन और गरिमा के साथ जीने का अधिकार
    – अनुच्छेद 23: जबरन और बंधुआ मजदूरी निषिद्ध
    – अनुच्छेद 39: मजदूरों का स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी
  2. अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन
    – ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) द्वारा निर्धारित 8 घंटे कार्यदिवस
  3. मजदूरों पर प्रभाव
    – स्वास्थ्य पर बुरा असर, दुर्घटनाओं की संभावना
    – परिवार और सामाजिक जीवन खतरे में
    – "स्वैच्छिक ओवरटाइम" के नाम पर जबरदस्ती
    – मजदूर आंदोलन की ऐतिहासिक जीत "8 घंटे काम, 8 घंटे विश्राम, 8 घंटे अपने लिए" को पीछे ले जाना

प्रार्थना (मांग)

  1. महाराष्ट्र कैबिनेट का 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय रद्द किया जाए।
  2. 8 घंटे कार्यदिवस का कानून सख्ती से लागू किया जाए।
  3. मजदूरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश दिए जाएं।
  4. न्यायालय जो उचित समझे, अन्य आदेश पारित करे।

अंतरिम मांग

अंतिम सुनवाई तक 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय लागू न करने के आदेश दिए जाएं।

✍️ याचिकाकर्ता:
Arun Ramchandra Pangarkar
अरुण रामचन्द्र पांगारकर

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