जनहित याचिका – मजदूरों के 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय अन्यायपूर्ण
जनहित याचिका – मजदूरों के 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय अन्यायपूर्ण
प्रकरण:
महाराष्ट्र सरकार ने कारखानों में काम करने वाले मजदूरों के कार्य के घंटे 9 से बढ़ाकर 12 करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय अन्यायपूर्ण, असंवैधानिक और मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए घातक है।
याचिकाकर्ता
Arun Ramchandra Pangarkar
अरुण रामचन्द्र पांगारकर
सामाजिक कार्यकर्ता, लेखक
प्रतिवादी
- महाराष्ट्र सरकार (मुख्य सचिव)
- भारत सरकार – श्रम और रोजगार मंत्रालय
- महाराष्ट्र सरकार – उद्योग मंत्रालय
मुद्दे
- संविधान का उल्लंघन
– अनुच्छेद 21: जीवन और गरिमा के साथ जीने का अधिकार
– अनुच्छेद 23: जबरन और बंधुआ मजदूरी निषिद्ध
– अनुच्छेद 39: मजदूरों का स्वास्थ्य और पारिवारिक जीवन सुरक्षित रखने की जिम्मेदारी - अंतरराष्ट्रीय नियमों का उल्लंघन
– ILO (अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन) द्वारा निर्धारित 8 घंटे कार्यदिवस - मजदूरों पर प्रभाव
– स्वास्थ्य पर बुरा असर, दुर्घटनाओं की संभावना
– परिवार और सामाजिक जीवन खतरे में
– "स्वैच्छिक ओवरटाइम" के नाम पर जबरदस्ती
– मजदूर आंदोलन की ऐतिहासिक जीत "8 घंटे काम, 8 घंटे विश्राम, 8 घंटे अपने लिए" को पीछे ले जाना
प्रार्थना (मांग)
- महाराष्ट्र कैबिनेट का 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय रद्द किया जाए।
- 8 घंटे कार्यदिवस का कानून सख्ती से लागू किया जाए।
- मजदूरों के स्वास्थ्य, सुरक्षा और सम्मान हेतु स्पष्ट दिशानिर्देश दिए जाएं।
- न्यायालय जो उचित समझे, अन्य आदेश पारित करे।
अंतरिम मांग
अंतिम सुनवाई तक 12 घंटे कार्यदिवस का निर्णय लागू न करने के आदेश दिए जाएं।
✍️ याचिकाकर्ता:
Arun Ramchandra Pangarkar
अरुण रामचन्द्र पांगारकर
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