गरीबांच्या ताटावर चर्चा, पण भ्रष्टांच्या तिजोरीवर मौन

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  गरीबांच्या ताटावर चर्चा, पण भ्रष्टांच्या तिजोरीवर मौन आजच्या समाजात एक विचित्र आणि वेदनादायक चित्र दिसते. गरीब माणसाला सरकारकडून काही किलो मोफत धान्य मिळाले, एखादी शिष्यवृत्ती मिळाली किंवा एखादी योजना मिळाली की लगेच काही लोक त्याला “फुकटखाऊ” म्हणू लागतात. पण दुसऱ्या बाजूला जनतेच्या पैशांवर डल्ला मारणारे, लाखो रुपयांचा पगार घेऊनही लाचखोरी करणारे अधिकारी आणि विकासकामांच्या नावाखाली कोट्यवधींचे कमिशन लाटणारे भ्रष्ट पुढारी यांच्याबद्दल मात्र समाजात तितक्याच तीव्रतेने चर्चा होताना दिसत नाही. गरीबांच्या ताटावर चर्चा होते; पण भ्रष्टांच्या तिजोरीवर मात्र मौन पाळले जाते. हीच आपल्या व्यवस्थेची आणि सामाजिक मानसिकतेची सर्वात मोठी शोकांतिका आहे. गरीब मदत घेतो, कारण परिस्थिती त्याला भाग पाडते एखादा शेतकरी दुष्काळामुळे उद्ध्वस्त होतो. एखादा मजूर रोजंदारी नसल्यामुळे उपाशी झोपतो. एखादी विधवा महिला, वृद्ध व्यक्ती किंवा बेरोजगार युवक शासनाच्या योजनेचा आधार घेतो. हे लोक मदत घेतात कारण त्यांच्याकडे पर्याय नसतो. त्यांना मोफत धान्य, शिष्यवृत्ती किंवा अनुदान ही चैनीची...

ऑनलाइन रमी और समान जुए जैसे खेलों पर केंद्र सरकार का आधिकारिक उत्तर

Shramik Kranti – Garibon Ka Aawaz

ऑनलाइन रमी और समान जुए जैसे खेलों पर केंद्र सरकार का आधिकारिक उत्तर

पत्रव्यवहार का संदर्भ:
दिनांक 28 जुलाई 2025 को मैंने “रमी, फैंटेसी लीग और इसी प्रकार के ऑनलाइन दांव-प्रवृत्ति वाले खेलों से होने वाले सामाजिक एवं आर्थिक नुकसान” के संबंध में माननीय प्रधानमंत्री जी तथा इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को निवेदन भेजा था। इस संदर्भ में मंत्रालय से मुझे नीचे दिया गया आधिकारिक उत्तर प्राप्त हुआ है।


इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय का उत्तर (दिनांक: 09 अगस्त 2025)

मंत्रालय ने दिनांक 09 अगस्त 2025 को श्री अरुण रामचंद्र पांगारकर द्वारा भेजे गए ईमेल का संज्ञान लिया है, जो ऑनलाइन रमी और समान खेलों पर राष्ट्रीय स्तर पर कड़े नियमन बनाने की अनुशंसा से संबंधित है।

इस संबंध में मंत्रालय द्वारा निम्नलिखित जानकारी दी गई है:

  1. भारत सरकार का उद्देश्य सभी उपयोगकर्ताओं के लिए खुला, सुरक्षित, विश्वसनीय और जवाबदेह इंटरनेट सुनिश्चित करना है। इस दिशा में समाज को लाभ पहुँचाने वाले किसी भी रचनात्मक सुझाव का मंत्रालय स्वागत करता है।
  2. "ऑनलाइन गेमिंग के प्रचार और विनियमन अधिनियम, 2025" (Promotion and Regulation of Online Gaming Act, 2025 – PROG Act 2025) को 22 अगस्त 2025 को अधिनियमित किया गया है। यह अधिनियम ऑनलाइन मनी गेम्स तथा उनसे संबंधित विज्ञापन और भुगतान सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाता है, जबकि ई-स्पोर्ट्स, शैक्षणिक और सामाजिक खेलों को प्रोत्साहन देता है। इस अधिनियम का उद्देश्य युवाओं और कमजोर वर्गों को आर्थिक, मानसिक और सामाजिक हानियों से बचाना तथा वित्तीय अखंडता, सार्वजनिक व्यवस्था और राष्ट्रीय सुरक्षा को बनाए रखना है।
  3. इस अधिनियम के अंतर्गत कौशल या संयोग आधारित किसी भी प्रकार के ऑनलाइन मनी गेम्स की आपूर्ति, प्रचार और सुविधा को अपराध घोषित किया गया है। साथ ही पारदर्शिता एवं उपभोक्ता संरक्षण के लिए एक राष्ट्रीय प्राधिकरण की स्थापना की गई है।
  4. इस अधिनियम की राजपत्र अधिसूचना दिनांक 22.08.2025 को प्रकाशित की गई है, और उसका संशोधन पत्र दिनांक 28.08.2025 को जारी किया गया है। दोनों दस्तावेज नीचे दिए गए लिंक पर उपलब्ध हैं:
    👉 https://www.meity.gov.in/static/uploads/2025/08/dd5d971e6e54b3949f57cee34c8e5026.pdf
  5. यह अधिनियम अभी लागू नहीं हुआ है।

लेखक की टिप्पणी:

केंद्र सरकार का यह उत्तर निश्चित रूप से सकारात्मक और दिशानिर्देशक है। फिर भी, ऑनलाइन जुए की लत से समाज पर पड़ रहे गंभीर प्रभावों को देखते हुए इस कानून का शीघ्र क्रियान्वयन अत्यंत आवश्यक है। साथ ही युवाओं में जागरूकता फैलाने और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास के लिए ठोस व्यवस्था बनाई जानी चाहिए।

— अरुण रामचंद्र पांगारकर
मु.पो. पांगरी बुद्रुक, तालुका सिन्नर, जिला नासिक – 422103 (महाराष्ट्र)


नोट: यह लेख ऊपर उल्लिखित पत्राचार एवं भारत सरकार के इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय से प्राप्त आधिकारिक ईमेल (Ministry of Electronics & Information Technology, Govt. of India) पर आधारित है।

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