महानायक सुभाषचंद्र!!
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महानायक सुभाषचंद्र!!
महानायक सुभाषचंद्र, देश की तुम हो शान!!
शब्द भी पड़ जाएँ कम, ऐसा है तेरा महिमान!!
शूर सिंह तुम, वीर अद्भुत, शौर्य की खान,
तुम्हारे कर्मों के साक्षी आज भी जर्मनी और जापान;
तुम्हारे चरणों में नतमस्तक सारा हिंदुस्तान।
तुम नभ का तपता सूरज, धधकता अंगार,
तेरी ज्वाला से पिघल गई अंग्रेज़ी सरकार;
मातृभूमि को मुक्त कराने तूने जगा दिया हुंकार।
मौलवी के वेश में तुम कैद से निकल आए,
संदूक से जैसे स्वयं शिवाजी महाराज प्रकट हो आए;
उस अद्वितीय साहस से भारत माता धन्य हो जाए।
रावलपिंडी से निकले बनकर ज़ियाउद्दीन,
भगतराम तलवार साथ बने रहमतखान नवीन;
नाम और वेश बदलकर बने तुम अफगान प्रवीन।
अफगान से जर्मनी तक किया तुमने प्रयाण,
ओरलैंडो माज़ूटा बन क्रांति का किया अभियान;
विदेशी धरती से जगा दी स्वतंत्रता की पहचान।
हिटलर से हाथ मिलाना पड़ा समय की मांग,
पर अनगिनत दिलों में जलाई देशभक्ति की आग;
युद्धबंदियों में फूंकी स्वतंत्रता की सांस।
जापान जाकर बनाई आज़ाद हिंद सेना,
लाखों हृदयों में बोई त्याग की भावना;
अमर वीर सिपाही लड़े, प्राणों की बाज़ी लगा।
“चलो दिल्ली” का नारा गूंजा चारों ओर,
ज़ंजीरें टूटने लगीं, आज़ादी हुई मुखर;
पीछे हटने लगा अंग्रेज़ी हैवान चोर।
पर नियति ने रचा एक क्रूर खेल नया,
महायुद्ध में जापान हारा, बदला समय का साया;
फिर भी तेरी क्रांति की आग कण-कण में समाया।
तेरी प्रेरणा से उठ खड़े हिंद के जवान,
तीनों सेनाओं का विद्रोह, झुका अंग्रेज़ी अभिमान;
अंततः इस धरती पर उगा स्वतंत्रता का महान बिहान।
धन्य, धन्य हो सुभाष बाबू, धन्य तुम्हारा जीवन!!
स्वतंत्रता के सच्चे जनक, तुम्हारा कोई नहीं प्रतिद्वंद्वन!!
नेताजी सुभाषचंद्र बोस की जय!!
महानायक सुभाषचंद्र बोस को कोटि-कोटि प्रणाम!!
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