महापुरुष तू महान

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महापुरुष तू महान ✍️ अरुण रामचंद्र पांगारकर महापुरुष तू महान मानव समतेचा पुजारी शिल्पकार घटनेचा तू दीन दलितांचा कैवारी ॥ धृ ॥ मंदिर ते काळ्या रामाचे नव्हते दलिता खुले, दीपला रामही तव तेजाने दर्शन त्याने दिले तूच स्थापिली मानवतेची मूर्ती त्या मंदिरी ॥ १ ॥ महापुरुष तू महान मानव समतेचा पुजारी... चाखवली चवदार तळ्याला चव तू खऱ्या धर्माची, गढूळ धर्माला नीतळता आणली मानवतेची तूच बुजवली धर्मामधली जातियतेची दरी ॥ २ ॥ महापुरुष तू महान मानव समतेचा पुजारी... तूच तोडील्या गुलामगिरीच्या खळा खळा श्रुंखला, अन् लाविली आग आंधळ्या दिव्य धर्म ग्रंथाला राख करी जो मनुस्मृतीची तूच तो नरकेसरी ॥ ३ ॥ महापुरुष तू महान मानव समतेचा पुजारी... ज्ञानसाधना तुझी अशी की तुच रे तुझिया सम, प्रज्ञा, शील, करुणा यांचा तू त्रिवेणी संगम तुझ्या लेखणीतून अवतरली समतेची पंढरी ॥ ४ ॥ महापुरुष तू महान मानव समतेचा पुजारी शिल्पकार घटनेचा तू दीन दलितांचा कैवारी

सब्ज़ी मंडी में किसानों की लूट – पूरी व्यवस्था का विश्लेषण

Shramik Kranti – Garibon Ka Aawaz

सब्ज़ी मंडी में किसानों की लूट – पूरी व्यवस्था का विश्लेषण

भारत एक कृषि प्रधान देश है और किसान देश की अर्थव्यवस्था की रीढ़ है। लेकिन दुर्भाग्य की बात यह है कि वही किसान अपनी उपज के उचित मूल्य के लिए संघर्ष कर रहा है।

सब्ज़ी मंडियों में किसानों के साथ कई प्रकार के आर्थिक अन्याय और शोषण की घटनाएँ होती हैं। किसान खेत में मेहनत करके सब्ज़ियाँ उगाता है, लेकिन मंडी में पहुँचने के बाद उसे अपनी उपज का सही दाम नहीं मिल पाता।

दलालों का जाल

अधिकतर मंडियों में दलालों और व्यापारियों का एक मजबूत नेटवर्क होता है। किसान को अपनी उपज बेचने के लिए इन्हीं के माध्यम से गुजरना पड़ता है। इस कारण किसान को बाजार का वास्तविक मूल्य नहीं मिल पाता।

तौल और कीमत में गड़बड़ी

कई जगहों पर तौल में गड़बड़ी की जाती है। कभी वजन कम दिखाया जाता है तो कभी कीमत कम लगाई जाती है। इसका सीधा नुकसान किसान को उठाना पड़ता है।

व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता

सरकार को ऐसी पारदर्शी व्यवस्था बनानी चाहिए जिससे किसान को अपनी उपज का उचित मूल्य सीधे मिल सके।

किसानों की मेहनत का सम्मान करना केवल आर्थिक आवश्यकता नहीं है बल्कि यह समाज की नैतिक जिम्मेदारी भी है।

लेखक : अरुण रामचंद्र पांगारकर
प्रणेता : श्रमिक क्रांति मिशन – गरीबों की आवाज

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