ऐसा हुआ तो ही किसानों के लिए खेती का व्यवसाय लाभकारी होगा!

ऐसा हुआ तो ही किसानों के लिए खेती का व्यवसाय लाभकारी होगा!

अन्न उत्पादन के लिए खेती करने में दिन-रात मेहनत करने वाले किसानों की उपज से व्यापारी और दलाल अमीर हो रहे हैं, जबकि किसान गरीब ही रह जाते हैं। इसका कारण एक ही है — कृषि उपज को उचित मूल्य (हमी भाव) न मिलना

इसका एक ही समाधान है — किसान और व्यापारी मिलकर काम करें। किसान और व्यापारी, दोनों के कार्य में समन्वय होना आवश्यक है।

वर्तमान स्थिति यह है कि व्यापारी किसानों से कम दाम में उपज खरीदते हैं और फिर उसे ऊँचे दाम पर बेचते हैं। कुछ अपवादस्वरूप, जब उपज की आवक कम होती है, तो किसानों को अच्छा भाव मिलता है। लेकिन यह एक जुआ जैसा है — कभी मिला तो मिला, वरना नहीं! यह अनिश्चित प्रणाली सही नहीं है।

संभावित समाधान:

  1. व्यापारी किसानों की उपज अपने कब्जे में लें।
  2. उस उपज को अपने व्यापारी मूल्य पर बाजार में बेचें।
  3. उपज बिकने के बाद प्राप्त रकम में से किसानों का उत्पादन खर्च और व्यापारियों का परिवहन व अन्य खर्च घटाएँ।
  4. शेष राशि को किसानों और व्यापारियों की मेहनत व खर्च के अनुपात में बाँटें।
  5. बाजार भाव का अध्ययन कर, व्यापारी किसानों को अगली फसल के लिए सुझाव दें, ताकि माँग और आपूर्ति में संतुलन बना रहे और अतिरिक्त उपज की समस्या न हो।

अगर ऐसा हुआ तो निश्चित ही खेती का व्यवसाय किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध होगा, जो फिलहाल केवल व्यापारियों और दलालों के लिए ही लाभदायक है।

– अरुण रामचंद्र पांगारकर
प्रणेता, आदर्श अर्थ वितरण प्रणाली आंदोलन तथा गरीबी उन्मूलन आंदोलन

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