भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में

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भारत–अमेरिका व्यापार समझौता : नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के आलोक में प्रस्तावना आज भारत–अमेरिका व्यापार समझौतों को लेकर बड़े-बड़े दावे किए जा रहे हैं। विदेशी निवेश, निर्यात वृद्धि और आर्थिक विकास जैसे आकर्षक शब्दों का प्रयोग किया जा रहा है। लेकिन इन चमकदार घोषणाओं के पीछे एक गंभीर सवाल छिपा है — क्या इन समझौतों में भारतीय किसान, श्रमिक और गरीब जनता के हित सुरक्षित हैं? इस प्रश्न का उत्तर हमें नेताजी सुभाष चंद्र बोस और डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर के विचारों के संदर्भ में खोजने की आवश्यकता है। नेताजी सुभाष चंद्र बोस : आर्थिक स्वतंत्रता के बिना राजनीतिक स्वतंत्रता अधूरी नेताजी का स्पष्ट मत था — “राजनीतिक स्वतंत्रता तभी सार्थक होती है, जब राष्ट्र आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर हो।” नेताजी ने केवल ब्रिटिश शासन के विरुद्ध संघर्ष नहीं किया, बल्कि विदेशी आर्थिक शोषण का भी तीव्र विरोध किया। वे भली-भांति जानते थे कि यदि राजनीतिक आज़ादी के बाद भी देश की अर्थव्यवस्था विदेशी शक्तियों और कंपनियों के हाथों में चली गई, तो स्वतंत्रता केव...

ग्रामीण अस्पतालों में सर्पदंश की दवा क्यों आवश्यक है?

 

ग्रामीण अस्पतालों में सर्पदंश की दवा क्यों आवश्यक है?

भारत के ग्रामीण क्षेत्रों में किसान, खेतिहर मजदूर और सामान्य नागरिकों को सर्पदंश का खतरा शहरी क्षेत्रों की तुलना में कई गुना अधिक होता है। खेतों में काम करना, रात भर जागरण, गर्मी-बरसात में खुले में रहना – इन सभी कारणों से ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाएँ बार-बार होती हैं।

लेकिन दुर्भाग्यवश, ऐसे समय पर जीवन रक्षक Anti-Snake Venom Serum (ASVS) अक्सर ग्रामीण अस्पतालों में उपलब्ध नहीं होता। इसके कारण पीड़ित को शहर के बड़े अस्पताल में ले जाना पड़ता है। इस दौरान समय नष्ट होता है और कई बार रोगी की मृत्यु हो जाती है।

समस्या क्यों गंभीर है?

  • भारत में हर साल 40,000 से अधिक मौतें सर्पदंश से होती हैं, जिनमें अधिकांश ग्रामीण क्षेत्रों की होती हैं।
  • ग्रामीण अस्पतालों में दवाओं और टीकों का भंडार अपर्याप्त होता है।
  • शहर तक पहुँचने से पहले ही रोगी की जान चली जाती है।
  • जनता में असुरक्षा की भावना बढ़ रही है।

क्या किया जाना चाहिए?

  1. ग्रामीण अस्पतालों में Anti-Snake Venom Serum का स्थायी भंडार रखा जाए।
  2. नियमित आपूर्ति की व्यवस्था – दवा हमेशा उपलब्ध रहे, इसकी जिम्मेदारी तय हो।
  3. मासिक रिपोर्ट सार्वजनिक की जाए – कितनी दवा आई, कितनी प्रयोग हुई और कितनी शेष है, इसकी पारदर्शी जानकारी।
  4. स्वास्थ्य कर्मचारियों को प्रशिक्षण – ताकि सर्पदंश के रोगी का तुरंत सही उपचार हो सके।

श्रमिक क्रांति मिशन की भूमिका

ग्रामीण गरीब और मजदूरों को स्वास्थ्य सुविधाएँ मिलना उनका मौलिक अधिकार है। सरकार को तुरंत कदम उठाने चाहिए, यही हमारी माँग है। अन्यथा यह गंभीर समस्या और अधिक जनहानि करेगी।

निष्कर्ष

सर्पदंश एक आपदा है, लेकिन समय पर Anti-Snake Venom Serum उपलब्ध हो तो रोगी की जान बचाई जा सकती है।
इसलिए ग्रामीण अस्पतालों में यह दवा उपलब्ध कराना केवल चिकित्सा आवश्यकता नहीं बल्कि ग्रामीण जनता के जीवन के अधिकार का प्रश्न है।

लेखक: अरुण रामचंद्र पांगारकर

प्रणेता, 

श्रमिक क्रांति मिशन: गरीबों की आवाज


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