वर्तमान राजनीति और मेरी भूमिका भाई-भतीजावाद से ग्रामहित की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता

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वर्तमान राजनीति और मेरी भूमिका

भाई-भतीजावाद से ग्रामहित की ओर बढ़ना समय की आवश्यकता


जब मैं अपने गाँव के भविष्य के बारे में सोचता हूँ, तो एक बात स्पष्ट दिखाई देती है कि वर्षों से स्थानीय राजनीति विकास, शिक्षा, पेयजल, रोजगार, स्वच्छता और जनकल्याण जैसे मूलभूत मुद्दों के बजाय परिवारवाद, गुटबाजी और तथाकथित सामाजिक प्रतिष्ठा के इर्द-गिर्द घूमती रही है।

परिवारों की प्रतिस्पर्धा में खोता हुआ विकास

चुनाव आते ही गाँव विभिन्न गुटों में बंट जाता है। मतदाता विकास और कार्यक्षमता के आधार पर नहीं, बल्कि "अपना परिवार", "अपना गुट" और "अपना व्यक्ति" के आधार पर मतदान करता है।

परिणामस्वरूप चुनाव समाप्त हो जाते हैं, चेहरे बदल जाते हैं, सत्ता बदल जाती है, लेकिन गाँव की समस्याएँ जस की तस बनी रहती हैं।

पीने का पानी, सड़कें, स्वच्छता, स्वास्थ्य, शिक्षा और रोजगार जैसे मुद्दे पीछे छूट जाते हैं, जबकि परिवारों की प्रतिष्ठा और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा केंद्र में आ जाती है।

सरपंच पद प्रतिष्ठा नहीं, जिम्मेदारी है

आज भी कई स्थानों पर राजनीति को सेवा का माध्यम नहीं, बल्कि प्रतिष्ठा प्राप्त करने का साधन समझा जाता है। चुनाव जीतने के बाद कुछ लोग इसे पूरे परिवार की उपलब्धि मानते हैं, जबकि वास्तव में यह पूरे गाँव की सेवा की जिम्मेदारी होती है।

सरपंच गाँव का मालिक नहीं होता, बल्कि गाँव का प्रथम सेवक होता है।

भाई-भतीजावाद से ग्रामहित की ओर

अब समय आ गया है कि हम परिवार आधारित राजनीति से ऊपर उठकर गाँव आधारित सोच को अपनाएँ।

किसी परिवार, गुट या समूह से पहले हम सभी एक ही गाँव के नागरिक हैं। गाँव का विकास किसी एक परिवार या समूह का विषय नहीं, बल्कि पूरे गाँव की सामूहिक जिम्मेदारी है।

आइए स्वयं से कुछ प्रश्न पूछें:

  • क्या हम विकास के लिए मतदान करते हैं या परिवारवाद के लिए?
  • क्या हम योग्य नेतृत्व चुनते हैं या केवल "अपने व्यक्ति" को?
  • क्या गाँव का हित गुटबाजी से बड़ा नहीं है?

मेरी स्पष्ट भूमिका

  • मैं परिवारवादी राजनीति का समर्थन नहीं करता।
  • मैं गुटबाजी की राजनीति का समर्थन नहीं करता।
  • मैं व्यक्तिपूजा की राजनीति का समर्थन नहीं करता।
  • मैं विकास आधारित राजनीति का समर्थन करता हूँ।
  • मैं पारदर्शी और जवाबदेह ग्राम प्रशासन का समर्थन करता हूँ।
  • मैं प्रत्येक नागरिक के सम्मान और समान अधिकार का समर्थन करता हूँ।

भाई-भतीजावाद नहीं, ग्रामहित चाहिए!

व्यक्तिपूजा नहीं, विकास चाहिए!

आइए, हम सब मिलकर एक आदर्श पांगरी के निर्माण का संकल्प लें।


✍️ अरुण रामचंद्र पांगारकर
श्रमिक क्रांति – गरीबों की आवाज़

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